टेक्नोलॉजी दिग्गज Meta एक नए प्रयोग को लेकर सुर्खियों में है, जिसमें कंपनी अपने कर्मचारियों की कंप्यूटर गतिविधियों को ट्रैक कर अगली पीढ़ी के एआई एजेंट्स को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इस पहल के तहत कर्मचारियों के माउस मूवमेंट, क्लिक और कीबोर्ड इनपुट जैसे व्यवहारिक डेटा को एकत्रित कर सकती है, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को वास्तविक दुनिया के डिजिटल कार्यों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
बताया जा रहा है कि यह पहल कंपनी के आंतरिक “मॉडल कैपेबिलिटी इनिशिएटिव” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एआई सिस्टम्स को अधिक सक्षम बनाना है ताकि वे जटिल कंप्यूटर कार्यों को खुद से पूरा कर सकें। इस प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चुनिंदा एप्लिकेशन और वेबसाइट्स पर उनकी गतिविधियों को मॉनिटर किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि वे किस तरह नेविगेशन करते हैं, कौन से बटन क्लिक करते हैं और किस प्रकार टाइपिंग व्यवहार अपनाते हैं। कुछ मामलों में स्क्रीनशॉट भी लिए जा सकते हैं, जिससे कार्य करने के तरीके को और गहराई से समझा जा सके।
कंपनी के प्रवक्ता Andy Stone के अनुसार, इस तरह का डेटा एआई को रोजमर्रा के डिजिटल कामों को समझने में मदद करेगा, जैसे किसी सॉफ्टवेयर में नेविगेट करना, मेन्यू का इस्तेमाल करना या किसी टास्क को चरणबद्ध तरीके से पूरा करना। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ऐसे एआई एजेंट्स तैयार करना है जो भविष्य में उपयोगकर्ताओं की ओर से स्वतः काम कर सकें, जैसे वर्कफ्लो मैनेज करना, एप्लिकेशन ऑपरेट करना या दोहराए जाने वाले कार्यों को पूरा करना।
हालांकि, इस योजना ने गोपनीयता को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की गतिविधियों की इतनी बारीकी से निगरानी करना नैतिक और कानूनी सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि Meta ने स्पष्ट किया है कि इस डेटा का उपयोग कर्मचारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए नहीं किया जाएगा, बल्कि केवल एआई सिस्टम को बेहतर बनाने के उद्देश्य से ही किया जाएगा।
इस पहल की शुरुआत अमेरिका में की जा सकती है, जहां डेटा से जुड़े नियम अपेक्षाकृत कम सख्त हैं। वहीं यूरोप जैसे क्षेत्रों में इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वहां General Data Protection Regulation जैसे कड़े डेटा सुरक्षा कानून लागू हैं। इससे पहले भी मेटा को यूरोपीय संघ में डेटा कलेक्शन को लेकर नियामकीय जांच का सामना करना पड़ा है, ऐसे में इस तरह की पहल का वैश्विक विस्तार आसान नहीं माना जा रहा है।
गौरतलब है कि एआई एजेंट्स को विकसित करने की होड़ में अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी आगे हैं। OpenAI, Google और Anthropic जैसे संगठनों ने भी ऐसे टूल्स पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन अभी तक ये सिस्टम जटिल और बहु-स्तरीय कार्यों को पूरी तरह से सटीकता के साथ पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में मेटा का मानना है कि वास्तविक उपयोगकर्ता व्यवहार से मिले डेटा के जरिए इन एआई मॉडल्स को अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिले हैं कि कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए एआई उपयोग से जुड़े कुछ लक्ष्य निर्धारित कर सकती है और भविष्य में कार्यबल में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। यह कदम जहां एक ओर तकनीकी नवाचार को तेज करने का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की निजता और डेटा सुरक्षा को लेकर संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी उजागर करता है।
कुल मिलाकर, Meta की यह पहल एआई के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़े गोपनीयता के मुद्दे आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा और बहस को जन्म दे सकते हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

